लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मदरसों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। विदेश से फंडिंग की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश भर में संचालित मदरसों की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के दायरे में राजधानी लखनऊ के भी 111 मदरसे शामिल हैं, जो लंबे समय से बिना मान्यता के संचालित बताए जा रहे हैं।
बिना मान्यता चल रहे मदरसों पर प्रशासन की नजर
सूत्रों के अनुसार जांच के घेरे में आए अधिकांश मदरसे ऐसे हैं, जो किसी भी मान्यता के बिना चल रहे हैं और अलग-अलग संस्थाओं के माध्यम से फंडिंग प्राप्त कर रहे हैं। प्रशासनिक नियंत्रण के अभाव में इन मदरसों में संचालित गतिविधियों की स्पष्ट जानकारी नहीं है, जिसको लेकर सरकार की चिंता बढ़ी है।
सुरक्षा एजेंसियों की जांच के बाद बढ़ी सतर्कता
दिल्ली में हुए बम धमाकों का कनेक्शन लखनऊ से सामने आने के बाद जांच एजेंसियां पहले से ही सक्रिय थीं। इस दौरान व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क के साथ-साथ अवैध मदरसों में रह रहे बाहरी छात्रों की भी गहन जांच की जा रही थी। इसी क्रम में कुछ मदरसों में विदेश से फंडिंग की शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद मुख्यमंत्री स्तर पर जांच के आदेश दिए गए।
एटीएस को सौंपी गई 4 हजार मदरसों की सूची
सूत्रों का कहना है कि एटीएस को पूरे प्रदेश से करीब 4 हजार मदरसों की सूची सौंपी गई है, जिनकी जांच की जानी है। जांच के दौरान फंडिंग के स्रोतों के साथ-साथ मदरसा संचालकों के बैंक खातों की भी पड़ताल की जाएगी। आशंका जताई जा रही है कि कुछ मदरसों को पड़ोसी देशों से आर्थिक मदद मिल रही है, जिसका दुरुपयोग देश विरोधी गतिविधियों में किया जा सकता है।
दो साल पहले भी हुई थी जांच, लखनऊ में मिले थे 111 अवैध मदरसे
गौरतलब है कि करीब दो वर्ष पहले नेपाल सीमा से सटे इलाकों में संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बाद भी सरकार ने मदरसों की जांच कराई थी। उस समय लखनऊ प्रशासन द्वारा गठित संयुक्त टीम की जांच में 111 ऐसे मदरसे सामने आए थे, जिनके पास न तो कोई मान्यता थी और न ही पंजीकरण।
फंडिंग और छात्रों की जानकारी भी नहीं थी स्पष्ट
पूर्व में हुई जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि इन मदरसों को मिलने वाली आय के स्रोतों की कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं थी। फंडिंग कहां से आ रही है, इसका स्पष्ट ब्यौरा नहीं दिया गया। साथ ही वहां पढ़ने वाले बच्चों और उनकी पृष्ठभूमि को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए थे। इन मदरसों में बच्चों को धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर रिकॉर्ड अधूरे पाए गए थे।
जांच में गड़बड़ी मिली तो होगी सख्त कार्रवाई
अधिकारियों का कहना है कि संबंधित एजेंसियों को सभी मदरसों की सूची सौंप दी गई है। जांच के दौरान यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता, अवैध फंडिंग या संदिग्ध गतिविधियां सामने आती हैं, तो सरकार सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।
